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बहन मायावती जी के मुख्यमंत्री कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में हुए प्रमुख विकास कार्य : शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बहुजन महापुरुषों की विरासत

 

बहन मायावती जी के मुख्यमंत्री कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में हुए प्रमुख विकास कार्य : शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बहुजन महापुरुषों की विरासत

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री एवं बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन मायावती जी का राजनीतिक जीवन सामाजिक न्याय, समानता और वंचित वर्गों की राजनीतिक भागीदारी के मुद्दों से जुड़ा रहा है। उनका मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल अलग-अलग चरणों में रहा, जबकि 13 मई 2007 से 2012 तक उनका कार्यकाल पूर्ण बहुमत वाली BSP सरकार के रूप में विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। इस दौर में सरकार ने कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, ग्रामीण विकास तथा सामाजिक परिवर्तन से जुड़े अनेक कार्यक्रमों पर जोर दिया।

बहुजन आंदोलन की वैचारिक पृष्ठभूमि को समझने के लिए DS4 यानी दलित शोषित समाज संघर्ष समिति और बाद में बनी बहुजन समाज पार्टी (BSP) की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। मान्यवर कांशीराम जी ने सामाजिक और राजनीतिक संगठन के माध्यम से बहुजन समाज को सत्ता और शासन में भागीदारी दिलाने का अभियान चलाया। इसी राजनीतिक धारा को आगे बढ़ाते हुए बहन मायावती जी ने उत्तर प्रदेश में कई ऐसी योजनाओं और संस्थानों को आगे बढ़ाया जिनका उद्देश्य सामाजिक रूप से पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को शिक्षा, रोजगार और सम्मान के अवसर उपलब्ध कराना था।

1. पार्क, स्मारक और प्रेरणा स्थल

बहन मायावती सरकार की सबसे दिखाई देने वाली उपलब्धियों में बहुजन महापुरुषों की स्मृति में बनाए गए विशाल पार्क और स्मारक शामिल हैं। लखनऊ और नोएडा में निर्मित इन स्थलों में डॉ. भीमराव आंबेडकर, माता रमाबाई आंबेडकर, मान्यवर कांशीराम तथा अन्य सामाजिक सुधारकों की विचारधारा को सार्वजनिक स्थानों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।

लखनऊ का डॉ. भीमराव आंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल, कांशीराम स्मारक स्थल, रमाबाई आंबेडकर मैदान तथा अन्य स्मारक परिसर इस दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। नोएडा में राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल एवं ग्रीन गार्डन भी बनाया गया। शोध में इन स्मारकों को सामाजिक परिवर्तन और बहुजन पहचान के सार्वजनिक प्रतीकों के रूप में भी देखा गया है।

इन स्थलों का उद्देश्य केवल भवन बनाना नहीं था, बल्कि उन महापुरुषों को सार्वजनिक स्मृति में स्थान देना था जिनकी भूमिका सामाजिक समानता, शिक्षा, मानवाधिकार और जाति-विरोधी आंदोलनों में रही।

2. स्वास्थ्य सुविधाओं और अस्पतालों का विस्तार

मायावती सरकार के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र में नए संस्थानों और अस्पतालों को विकसित करने का प्रयास हुआ। लखनऊ में कांशीराम जी शहरी गरीब आवास योजना जैसी योजनाओं के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी ध्यान दिया गया। लखनऊ के सेंचुरीनरी अस्पताल में सुपर-स्पेशियलिटी सुविधाओं के विस्तार और क्रिटिकल केयर सुविधाओं का उल्लेख मिलता है।

ग्रेटर नोएडा में मान्यवर कांशीराम बहु-विशेषता अस्पताल की स्थापना भी इसी दौर की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में रही। उपलब्ध विवरण के अनुसार इसकी OPD सेवाएं बाद में शुरू हुईं।

स्वास्थ्य क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों की स्थापना थी। कन्नौज, जालौन, अंबेडकर नगर और सहारनपुर के मेडिकल कॉलेजों के लिए केंद्र सरकार के Special Component Plan (SCP) से धन उपलब्ध कराने और उनके निर्माण में राज्य सरकार की भूमिका का सरकारी रिकॉर्ड में उल्लेख है।

3. चार मेडिकल कॉलेज और 70% SC/ST सीटों का प्रावधान

यह विषय आज भी विशेष चर्चा का विषय है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2025 के एक निर्णय में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दिए गए रिकॉर्ड के आधार पर बताया गया कि कन्नौज, जालौन, अंबेडकर नगर और सहारनपुर में मेडिकल कॉलेज Special Component Plan के अंतर्गत स्थापित किए गए थे।

सरकारी रिकॉर्ड में यह भी बताया गया कि इन संस्थानों के लिए केंद्र सरकार के 5 जुलाई 2007 के दिशा-निर्देशों के अनुसार 70% सीटें SC/ST, 15% OBC और 15% सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित की गई थीं। साथ ही संस्थानों की स्थापना के खर्च में 70% SC/ST Sub-Plan और 30% सामान्य योजना से लेने का प्रावधान बताया गया था।

2010 की एक समकालीन रिपोर्ट में भी कन्नौज, जालौन और सहारनपुर के मेडिकल कॉलेजों तथा झांसी के पैरामेडिकल कॉलेज को Special Component Plan से जोड़ते हुए प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में 70% सीटें SC/ST विद्यार्थियों के लिए प्रस्तावित किए जाने का उल्लेख किया गया था।

इसलिए यह कहना अधिक सही होगा कि 70% प्रावधान का संबंध SC/ST Sub-Plan और विशेष रूप से स्थापित इन संस्थानों से था, न कि उत्तर प्रदेश के प्रत्येक मेडिकल कॉलेज पर सामान्य रूप से लागू 70% आरक्षण से।

4. भूमि और SC/ST परिवारों के लिए पट्टे

ग्रामीण गरीबों और भूमिहीन परिवारों को जमीन उपलब्ध कराने के लिए पट्टा वितरण अभियान भी मायावती सरकार की नीतियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। उपलब्ध विवरण के अनुसार सरकार ने ग्राम सभा की जमीन पर अवैध कब्जों को हटाकर पात्र गरीब परिवारों की पहचान करने और उन्हें भूमि देने के निर्देश दिए।

2010 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 5,596 SC/ST लोगों को लगभग 1,054.879 हेक्टेयर कृषि भूमि आवंटित किए जाने का उल्लेख मिलता है। यह आंकड़ा लगभग 2,607 एकड़ के बराबर बैठता है।

“हर परिवार को तीन एकड़” को सार्वभौमिक रूप से लागू योजना बताने के बजाय इसे उस समय के भूमि-पट्टा अभियान और कमजोर वर्गों को भूमि उपलब्ध कराने की नीति के संदर्भ में देखना अधिक उचित है।

5. सरकारी रोजगार और नई नियुक्तियां

मायावती सरकार ने बेरोजगारी भत्ता देने के बजाय रोजगार उपलब्ध कराने की नीति पर जोर देने की बात कही थी। 2007-09 के दौरान सरकार की ओर से लाखों लोगों के लिए रोजगार की व्यवस्था किए जाने का दावा किया गया था। एक समकालीन विवरण में मई 2007 से जनवरी 2009 के बीच लगभग 7 लाख लोगों के लिए सरकारी क्षेत्र में स्थायी रोजगार तथा लगभग 2 लाख लोगों के लिए गैर-सरकारी क्षेत्र में रोजगार की व्यवस्था का दावा दर्ज है।

इसके अलावा गांवों में सफाई कर्मचारियों के बड़े पैमाने पर पद सृजित किए गए। एक अध्ययन में प्रत्येक राजस्व गांव में सफाई कर्मचारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक लाख से अधिक सफाईकर्मी पदों की भर्ती का उल्लेख मिलता है।

शिक्षकों की भर्ती भी इस दौर की महत्वपूर्ण गतिविधियों में रही। 2011 में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए लगभग 72,000 शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई थी। हालांकि उस भर्ती प्रक्रिया में बाद में अनियमितताओं के आरोप और कानूनी विवाद भी सामने आए। इसलिए रोजगार के आंकड़ों को उपलब्ध सरकारी/समकालीन रिकॉर्ड के संदर्भ में देखना चाहिए।

6. शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा विस्तार

मायावती सरकार के कार्यकाल में शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया। प्राथमिक शिक्षा से लेकर तकनीकी और उच्च शिक्षा तक नए संस्थानों की स्थापना और विस्तार की योजनाएं आगे बढ़ाई गईं।

आपके द्वारा दिए गए विवरण में लगभग 200 डिग्री कॉलेज, 200 पॉलिटेक्निक, 576 हाई स्कूल और 5,000 से अधिक प्राथमिक विद्यालयों का उल्लेख किया गया है। इन संख्याओं को वेबसाइट पर प्रकाशित करते समय इन्हें “सरकार/समर्थकों द्वारा बताए गए आंकड़े” के रूप में प्रस्तुत करना बेहतर है, क्योंकि उपलब्ध स्वतंत्र स्रोतों में इन सभी संख्याओं का एक ही आधिकारिक दस्तावेज में पुष्टिकरण नहीं मिला है।

फिर भी तकनीकी शिक्षा के विस्तार की दिशा में सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों का नेटवर्क बढ़ा और आज उत्तर प्रदेश के तकनीकी शिक्षा रिकॉर्ड में उस दौर से जुड़े संस्थान दिखाई देते हैं। उदाहरण के लिए कुमारी मायावती राजकीय महिला पॉलिटेक्निक, बादलपुर, गौतम बुद्ध नगर आज भी उत्तर प्रदेश के तकनीकी शिक्षा संस्थानों की सूची में दर्ज है।

7. उच्च शिक्षा और विश्वस्तरीय संस्थानों की दिशा

मायावती सरकार की उच्च शिक्षा से जुड़ी सबसे चर्चित परियोजनाओं में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा शामिल है। इसका कानून 2002 में बना था और विश्वविद्यालय ने 2008 में अपना पहला शैक्षणिक सत्र शुरू किया। विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार इसका विशाल आवासीय परिसर अंतरराष्ट्रीय स्तर के उच्च शिक्षा संस्थानों की तर्ज पर विकसित किया गया और आज यह UGC से मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय है।

एक अन्य महत्वपूर्ण संस्थान डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ है। यह विशेष रूप से दिव्यांग विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा और आत्मनिर्भरता के उद्देश्य से स्थापित किया गया। 2009 में इसके उद्घाटन के समय इसे दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए विशेष विश्वविद्यालय के रूप में प्रस्तुत किया गया था।

इस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 2008 में अध्यादेश जारी हुआ था और बाद में इसे अधिनियम का रूप दिया गया।

इसके अतिरिक्त उस दौर में तकनीकी और उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, पुराने विश्वविद्यालयों के नामों को बहुजन और सामाजिक सुधारकों के नाम से जोड़ने तथा नए पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम हुआ।

छह प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थानों के उदाहरण

वेबसाइट पर “छह विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय” लिखते समय सावधानी आवश्यक है, क्योंकि सभी छह संस्थानों को मायावती सरकार द्वारा नया स्थापित किया गया कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। बेहतर शीर्षक है—“मायावती काल में उच्च शिक्षा से जुड़े प्रमुख संस्थान और नामकरण”

  1. गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा
  2. डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ
  3. महामाया टेक्निकल यूनिवर्सिटी, नोएडा
  4. छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर — पुराने कानपुर विश्वविद्यालय का नाम परिवर्तन
  5. डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा — सामाजिक न्याय की विरासत से जुड़ा नाम
  6. महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली — सामाजिक सुधारक ज्योतिबा फुले की विरासत से जुड़ा नाम

इनमें पहले दो संस्थानों की स्थापना/विकास का मायावती सरकार से सीधा संबंध है, जबकि अन्य नामकरण और संस्थागत विकास की प्रक्रिया को अलग-अलग ऐतिहासिक संदर्भों में देखना चाहिए।

8. बहुजन महापुरुषों के नाम पर जिलों का नामकरण

मायावती सरकार ने प्रशासनिक इकाइयों के नाम सामाजिक सुधारकों और बहुजन महापुरुषों से जोड़ने की नीति भी अपनाई। उदाहरण के तौर पर कुछ जिलों के नाम कांशीराम नगर, भीमनगर, पंचशील नगर, प्रबुद्धनगर, महामायानगर, रमाबाई नगर और छत्रपति शाहूजी महाराज नगर किए गए थे।

इन नामकरणों का उद्देश्य बहुजन समाज के इतिहास और सामाजिक परिवर्तन के नायकों को सरकारी प्रशासनिक पहचान में स्थान देना था। बाद की सरकारों में इनमें से कई जिलों के नाम फिर बदल दिए गए, इसलिए वर्तमान और तत्कालीन नामों में अंतर मिल सकता है।

9. SC/ST के साथ सामाजिक न्याय और ठेकेदारी में भागीदारी

मायावती सरकार ने केवल सरकारी नौकरियों में आरक्षण की चर्चा नहीं की, बल्कि सरकारी और अर्ध-सरकारी ठेकों में भी SC/ST भागीदारी बढ़ाने की नीति अपनाने की कोशिश की। 2009 में सरकार ने ₹5 लाख तक के सरकारी और अर्ध-सरकारी कार्यों के ठेकों में SC/ST के लिए आरक्षण की घोषणा की थी। रिपोर्ट के अनुसार SC के लिए 21% और ST के लिए 2% हिस्सेदारी का प्रावधान प्रस्तावित किया गया था।

इस कदम का उद्देश्य यह था कि आरक्षण का लाभ केवल नौकरी तक सीमित न रहे, बल्कि निर्माण, ठेकेदारी और आर्थिक गतिविधियों में भी वंचित वर्गों की भागीदारी बढ़े।

10. सड़क, एक्सप्रेसवे, बिजली और आधारभूत ढांचा

मायावती सरकार के दौरान आधारभूत ढांचे पर भी बड़ा जोर रहा। यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना को आगे बढ़ाया गया, जो बाद में नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र को आगरा से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क परियोजना बनी। गंगा एक्सप्रेसवे की आधारशिला भी उनके कार्यकाल में रखी गई थी।

बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए भी परियोजनाओं पर काम शुरू हुआ। उपलब्ध विवरण के अनुसार सरकार ने NTPC के साथ 1,320 MW क्षमता की परियोजना के लिए समझौता किया था तथा नवीकरणीय ऊर्जा में भी शुरुआती प्रयास किए गए।

नोएडा क्षेत्र में मेट्रो कनेक्टिविटी को आगे बढ़ाना भी उसी दौर के शहरी विकास का हिस्सा था। 2009 में नोएडा मेट्रो परियोजना के उद्घाटन का उल्लेख समकालीन स्रोतों में मिलता है।

11. बहुजन विचारधारा और सामाजिक सम्मान

मायावती सरकार की नीतियों को केवल निर्माण कार्यों की सूची के रूप में देखना अधूरा होगा। BSP और DS4 की राजनीतिक विचारधारा में सामाजिक सम्मान, प्रतिनिधित्व और सत्ता में भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया। इसी कारण डॉ. आंबेडकर, ज्योतिबा फुले, छत्रपति शाहूजी महाराज, संत रविदास, कबीर, नारायण गुरु, गौतम बुद्ध, मान्यवर कांशीराम और माता रमाबाई जैसे महापुरुषों की स्मृति को सार्वजनिक स्थानों में प्रमुखता दी गई।

इस दृष्टिकोण के समर्थकों का तर्क रहा कि जिन सामाजिक सुधारकों को लंबे समय तक सरकारी स्मृति में पर्याप्त स्थान नहीं मिला, उनके नाम पर स्मारक, पार्क, संस्थान और जिलों के नाम रखे जाने से समाज में आत्मसम्मान और इतिहास-बोध मजबूत हुआ।

निष्कर्ष

बहन मायावती जी के मुख्यमंत्री कार्यकाल का मूल्यांकन करते समय दो पहलुओं को साथ-साथ देखना जरूरी है। पहला, उनके शासन में बड़े पैमाने पर स्मारक, पार्क, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक परियोजनाएं शुरू हुईं। दूसरा, इन परियोजनाओं की लागत, प्राथमिकताओं और कुछ योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस भी हुई है।

फिर भी शिक्षा के विस्तार, दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय, Special Component Plan के माध्यम से मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, SC/ST के लिए विशेष अवसर, भूमि-पट्टा अभियान, सरकारी रोजगार तथा बहुजन महापुरुषों को सार्वजनिक पहचान देने की नीति मायावती सरकार की प्रमुख विरासतों में गिनी जाती है।

आज जब उत्तर प्रदेश के विकास और सामाजिक न्याय की चर्चा होती है, तब BSP, DS4 और बहुजन आंदोलन की राजनीतिक यात्रा तथा बहन मायावती के शासनकाल की इन योजनाओं का तथ्यात्मक अध्ययन आवश्यक है। समर्थकों के लिए यह दौर सामाजिक सम्मान और प्रतिनिधित्व का महत्वपूर्ण अध्याय है, जबकि आलोचकों के लिए इसकी लागत और प्राथमिकताओं पर प्रश्न भी महत्वपूर्ण हैं। इतिहास का संतुलित मूल्यांकन इसी दोनों पक्षों को सामने रखकर किया जाना चाहिए।


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